श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में देवदत्त पडिक्कल का बल्ला कुछ अलग ही कहानी लिख रहा है। पहले टेस्ट में 167 रन और अब दूसरे टेस्ट में भी शतक। यानी जिस खिलाड़ी को सीरीज शुरू होने से पहले शायद ज्यादा चर्चा नहीं मिल रही थी। वही अब टीम इंडिया की बल्लेबाजी में सबसे ज्यादा बात किए जाने वाले नामों में शामिल हो गया है।
कोलंबो टेस्ट के पहले दिन पडिक्कल ने 117 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने 193 गेंदों का सामना करते 12 चौके लगाए। उनकी इस पारी ने भारत को दिन के आखिर तक 300 रन के मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
शुरुआत में ही कहानी बिगड़ सकती थी
पडिक्कल के लिए यह पारी बिल्कुल आसान नहीं थी। शुरुआत में ही उन्हें दो बार जीवनदान मिला। अगर श्रीलंका ने उन मौकों को पकड़ लिया होता तो शायद पडिक्कल इतनी बड़ी पारी खेल ही नहीं पाते और शायद मैच का रुख कुछ और ही होता।
लगातार दूसरी सेंचुरी ने बदल दी तस्वीर
पहले टेस्ट में 167 रन बनाने के बाद बहुत लोगों ने सोचा होगा कि यह बस एक शानदार पारी थी। लेकिन दूसरे टेस्ट में फिर शतक लगाकर पडिक्कल ने शायद सबसे अच्छा जवाब दे दिया। पडिक्कल ने यह भी दिखा दिया है कि उन्हें लंबी पारी खेलने में कोई परेशानी नहीं है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में जब टीम को किसी ऐसे बल्लेबाज की जरूरत होती है जो काफी देर तक क्रीज पर रह सके।
अब टीम इंडिया के सामने नया सवाल
पडिक्कल के लगातार अच्छे प्रदर्शन ने भारतीय टीम के लिए एक अच्छी परेशानी खड़ी कर दी है। अच्छी इसलिए क्योंकि टीम के पास एक और भरोसेमंद बल्लेबाज तैयार होता दिख रहा है। नंबर-3 पर बल्लेबाजी करते हुए अगर कोई खिलाड़ी लगातार रन बना दे तो फिर टीम मैनेजमेंट के लिए उसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होता। पडिक्कल ने अभी सिर्फ दो टेस्ट में ही इतना कुछ कर दिया है कि अब उनके प्रदर्शन को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा।
अब पडिक्कल को रोकना आसान नहीं होगा
एक सीरीज में लगातार दो शतक लग जाएं तो खिलाड़ी का आत्मविश्वास अपने आप बढ़ जाता है। पहले 167 रन ने उनका नाम चर्चा में ला दिया था और अब 117 ने उस चर्चा को और ज्यादा बड़ा कर दिया है। अब आगे जब भी भारतीय टेस्ट टीम चुनेगी, पडिक्कल का नाम सिर्फ एक विकल्प की तरह नहीं देखा जाएगा।
